Friday, 13 March 2026

भोजपुरी सिनेमा में पारिवारिक ड्रामा का तड़का! ‘स्वर्ग से प्यारा घर हमारा’ और ‘अम्बे है मेरी मां’ के ट्रेलर रिलीज


 भोजपुरी सिनेमा की दो बड़ी फिल्मों Swarg Se Pyara Ghar Hamara और Ambe Hai Meri Maa के ट्रेलर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। इन फिल्मों में पारिवारिक रिश्तों, संघर्ष और भावनाओं की कहानी को प्रमुखता से दिखाया गया है।

फिल्म ‘स्वर्ग से प्यारा घर हमारा’ में भोजपुरी सुपरस्टार Amrapali Dubey एक आदर्श बहू के किरदार में नजर आ रही हैं। कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां सास का घर पर पूरा नियंत्रण होता है और बहुओं को उसके नियमों के अनुसार ही रहना पड़ता है। लेकिन आम्रपाली का किरदार घर में आते ही इस वर्चस्व को चुनौती देता दिखाई देता है।

फिल्म में बड़ा मोड़ तब आता है जब ससुर के निधन के बाद परिवार के हालात बदल जाते हैं और अन्य बहुएं सास के साथ दुर्व्यवहार करने लगती हैं। ऐसे समय में आम्रपाली अपनी पुरानी नाराजगी भुलाकर सास के साथ खड़ी होती हैं और उन्हें सम्मान दिलाने की कोशिश करती हैं।

वहीं दूसरी ओर Akshara Singh की फिल्म ‘अम्बे है मेरी मां’ का ट्रेलर भी रिलीज हुआ है, जिसमें उनका रौद्र और शक्तिशाली रूप देखने को मिल रहा है।

‘स्वर्ग से प्यारा घर हमारा’ का निर्देशन Praveen Kumar Guduri ने किया है, जबकि इसका निर्माण Worldwide Film Productions के बैनर तले Pradeep Singh और Prateek Singh ने किया है।

अलका याग्निक–उदित नारायण का अमर रोमांटिक गीत! ‘चांद के पार चलो’ आज भी जगा देता है रूहानी मोहब्बत


 2000 के दशक के रोमांटिक गानों की बात हो और फिल्म Chand Ke Paar Chalo का टाइटल ट्रैक याद न आए, ऐसा शायद ही हो। यह गीत आज भी उन लोगों की प्लेलिस्ट में खास जगह रखता है, जिन्हें पुराने रोमांटिक गाने सुनना पसंद है।

फिल्म का मशहूर गीत Chand Ke Paar Chalo सुरों के जादूगर Udit Narayan और मधुर आवाज की मलिका Alka Yagnik ने गाया था। उस दौर में इन दोनों गायकों की जोड़ी को सुपरहिट गानों की गारंटी माना जाता था।

इस गाने के बोल गीतकार Rishi Azad ने लिखे थे, जो बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले हैं। खासकर “चांद के पार चलो…” जैसी पंक्तियां श्रोताओं को एक अलग ही सुकून और रोमांटिक एहसास देती हैं। वहीं इसका संगीत Vishnu Narayan ने तैयार किया था, जिसकी मधुर धुन इस गीत को और भी यादगार बनाती है।

गाने के वीडियो में Sahib Chopra और Preeti Jhangiani की सादगी भरी केमिस्ट्री भी दर्शकों को खूब पसंद आई थी। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन इसका यह टाइटल ट्रैक आज भी रेडियो, म्यूजिक चैनलों और यूट्यूब पर खूब सुना जाता है।

‘राम्या’ फिल्म रिव्यू: सत्ता, साजिश और बदले की कहानी, 90 के दशक की राजनीति में ले जाती है यह दमदार ड्रामा


 

राजनीति, सत्ता संघर्ष और बदले की कहानी पर बनी फिल्म Ramya दर्शकों को 1990 के दशक की उथल-पुथल भरी दुनिया में ले जाती है। निर्देशक Santosh Parab की इस फिल्म में राजनीति के काले खेल और एक आम युवक के खौफनाक सफर को प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे नौजवान के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी अचानक बदल जाती है। सत्ता की राजनीति और साजिशों के जाल में फंसकर वह सलाखों के पीछे पहुंच जाता है। इसके बाद शुरू होता है उसका संघर्ष और बदले का सफर, जो कहानी को रोमांचक बना देता है।

फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले Janmejaya Singh ने अपने अभिनय से किरदार को जीवंत कर दिया है। वहीं अनुभवी अभिनेता Sayaji Shinde की मौजूदगी फिल्म को और मजबूत बनाती है।

तकनीकी पहलुओं की बात करें तो फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के तनाव और भावनाओं को बेहतर तरीके से उभारता है। इसके साथ ही कसी हुई एडिटिंग और सशक्त सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक प्रभावशाली राजनीतिक ड्रामा बनाती है।

कुल मिलाकर ‘राम्या’ एक ऐसी फिल्म है जो सत्ता, राजनीति और इंसाफ की लड़ाई को गंभीर अंदाज में पेश करती है। अगर आपको राजनीतिक थ्रिलर और बदले की कहानी पसंद है, तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आ सकती है।

बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच सकती है ‘धुरंधर 2’! पहले दिन 90 करोड़ की ओपनिंग का अनुमान


 बॉलीवुड की मोस्ट अवेटेड फिल्म Dhurandhar 2: The Revenge रिलीज से पहले ही सुर्खियों में है। 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में आने वाली इस फिल्म को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स ने बड़ी भविष्यवाणी की है।

फिल्म में Ranveer Singh, Sanjay Dutt, R. Madhavan और Arjun Rampal जैसे बड़े सितारे नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

बॉक्स ऑफिस के चर्चित ट्रेड एनालिस्ट Taran Adarsh ने खास बातचीत में बताया कि फिल्म ऐतिहासिक शुरुआत कर सकती है। उनके मुताबिक ‘धुरंधर 2’ के पेड प्रीव्यू से ही करीब 40–45 करोड़ रुपये की कमाई हो चुकी है। उनका अनुमान है कि जब एडवांस बुकिंग पूरी तरह शुरू होगी, तो फिल्म पहले दिन 80 से 90 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर सकती है।

वहीं फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट Komal Nahta का मानना है कि यह फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती है। उनके अनुसार फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज है, जो टिकट बिक्री में साफ नजर आ रहा है।

फिल्म का पेड प्रीव्यू 18 मार्च को रखा गया है, जिसके बाद 19 मार्च को यह देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अगर ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुमान सही साबित होते हैं, तो ‘धुरंधर 2’ हिंदी सिनेमा के लिए नया बॉक्स ऑफिस बेंचमार्क तय कर सकती है।

अमिताभ की फिल्म में जया का शशि कपूर संग रोमांस! लता–किशोर का गाया ‘सर से सरकी’ आज भी सुपरहिट

 

हिंदी सिनेमा के गोल्डन दौर की कई फिल्मों के गाने आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। ऐसी ही एक यादगार फिल्म है Silsila, जिसमें Amitabh Bachchan, Jaya Bachchan, Rekha और Shashi Kapoor मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।

फिल्म का लोकप्रिय गीत Sar Se Sarke आज भी श्रोताओं के बीच काफी पसंद किया जाता है। इस रोमांटिक गाने में दिलचस्प बात यह है कि जया बच्चन पर्दे पर शशि कपूर के साथ रोमांटिक अंदाज में नजर आती हैं, जबकि फिल्म की कहानी में वह अमिताभ बच्चन की पत्नी की भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि यह गाना उस दौर में भी खूब चर्चा में रहा था।

इस गीत को सुरों की मलिका Lata Mangeshkar और महान गायक Kishore Kumar ने अपनी आवाज दी थी। गाने के बोल Hasan Kamal ने लिखे थे, जबकि संगीत मशहूर जोड़ी Shiv–Hari ने तैयार किया था।

साल 1981 में रिलीज हुई ‘सिलसिला’ को उस समय एक रोमांटिक क्लासिक फिल्म माना गया। फिल्म की कहानी में रिश्तों, प्यार और जटिल भावनाओं को दिखाया गया था, जिसमें अमिताभ और रेखा के बीच के रिश्ते को भी अहम तरीके से पेश किया गया था।

आज भी ‘सर से सरकी’ जैसे गाने पुराने हिंदी फिल्म संगीत की खूबसूरती और मधुरता की याद दिलाते हैं।

टीआरपी में बड़ा उलटफेर! ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर-1, ‘अनुपमा’ को झटका, ‘नागिन 7’ की टॉप-5 में


 भारतीय टेलीविजन की टीआरपी रेस में इस हफ्ते बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लंबे समय से चार्ट पर राज कर रहा Anupamaa अब नंबर-1 की कुर्सी से नीचे खिसक गया है। उसकी जगह Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2 ने शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।

इस शो में Smriti Irani और Amar Upadhyay की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को पसंद आ रही है। हाल ही में कहानी में आए बड़े ट्विस्ट—जहां मिहिर ने सबके सामने नोइना का सच उजागर किया—ने दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा दी। यही वजह है कि शो को 2.1 की टीआरपी रेटिंग और करीब 2.9 की रीच मिली है।

वहीं Rupali Ganguly स्टारर ‘अनुपमा’ अभी भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन इस हफ्ते उसे दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। पिछले कई महीनों से यह शो लगातार दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ था।

दूसरी ओर Naagin 7 ने भी शानदार वापसी की है। Priyanka Chahar Choudhary स्टारर यह शो पिछले हफ्ते थोड़ा पिछड़ गया था, लेकिन इस बार जोरदार कमबैक करते हुए फिर से टॉप-5 में अपनी जगह बना ली है।

इसके अलावा Udne Ki Aasha की टीआरपी में भी अच्छा उछाल देखा गया है, जो शो के निर्माताओं के लिए राहत की खबर है।

कुल मिलाकर इस हफ्ते की टीआरपी लिस्ट ने टीवी इंडस्ट्री में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा का संकेत दिया है और आने वाले हफ्तों में नंबर-1 की जंग और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

Thursday, 26 February 2026

आरएसएस पर बनी ‘शतक’ राजस्थान में टैक्स फ्री, सस्ते टिकट में देख सकेंगे दर्शक




 नई दिल्ली. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म Shatak को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों के सफर पर आधारित इस फिल्म को राजस्थान सरकार ने टैक्स फ्री घोषित कर दिया है। राज्य के वित्त विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर फिल्म को मनोरंजन कर से छूट देने की मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के बाद अब राजस्थान में दर्शक कम कीमत पर सिनेमाघरों में ‘शतक’ देख सकेंगे। 19 फरवरी को रिलीज हुई यह फिल्म Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) के इतिहास, विचारधारा और संगठन के विकास को बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करती है।

फिल्म में संघ के संस्थापक Keshav Baliram Hedgewar और दूसरे सरसंघचालक Madhav Sadashiv Golwalkar के जीवन, संघर्ष और संगठन विस्तार की कहानी को दर्शाया गया है। आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के जरिए ऐतिहासिक घटनाओं को प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया है।

राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद फिल्म को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। समर्थकों का मानना है कि टैक्स फ्री होने से ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देख सकेंगे, वहीं आलोचक इसे वैचारिक बहस का विषय बता रहे हैं।

सुदीप्तो सेन की ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का ट्रेलर रिलीज, गांव की आस्था के बीच दिखा अंधविश्वास और खौफ


 मुंबई. Sudipto Sen की नई फिल्म Charak: Fair of Faith का ट्रेलर रिलीज हो गया है। ‘The Kerala Story’ के बाद यह उनका नया प्रोजेक्ट है, जिसे उन्होंने प्रोड्यूस किया है। फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

फिल्म का निर्देशन Sheeladitya Moulik ने किया है। ट्रेलर में एक छोटे से गांव की कहानी दिखाई गई है, जहां आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा धुंधली पड़ती नजर आती है। कहानी ‘चरक मेला’ की पृष्ठभूमि पर आधारित है—एक पारंपरिक उत्सव, जिसमें लोगों की गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी होती हैं।

ट्रेलर में बलि, तांत्रिक गतिविधियों और खतरनाक रस्मों की झलक दिखाई गई है, जो माहौल को रहस्यमय और भयावह बनाती है। जैसे-जैसे ट्रेलर आगे बढ़ता है, कहानी और ज्यादा डार्क होती जाती है और दर्शकों को असहज करने वाले सवाल छोड़ जाती है।

फिल्म में Anjali Patil समेत कई प्रतिभाशाली कलाकार नजर आ रहे हैं। ट्रेलर आस्था बनाम कट्टरता, भक्ति बनाम विनाश जैसे मुद्दों को उठाता है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि जब विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है तो उसका अंजाम क्या हो सकता है।

जितेंद्र ने ठुकराई फिल्म, फिर Amitabh Bachchan-Meenakshi Seshadri की जोड़ी भी नहीं बचा पाई, फ्लॉप होते ही डायरेक्टर ने छोड़ दी इंडस्ट्री


 80 के दशक के आखिर में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जिससे मेकर्स को बड़ी उम्मीदें थीं। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए Jeetendra और Jaya Prada को कास्ट करने की चर्चा थी, लेकिन बात नहीं बन सकी। बाद में फिल्म में सदी के महानायक Amitabh Bachchan और उस दौर की सुपरस्टार Meenakshi Seshadri को साइन किया गया।

फिल्म थी Ganga Jamuna Saraswati, जिसे मशहूर फिल्मकार Manmohan Desai ने डायरेक्ट किया था। 1988 में रिलीज हुई इस फिल्म को बड़े पैमाने पर बनाया गया था। दमदार स्टारकास्ट, भव्य सेट और मसाला एंटरटेनमेंट के बावजूद यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई।

कहा जाता है कि फिल्म में कुछ बोल्ड और इमोशनल सीन ने भी काफी चर्चा बटोरी, लेकिन कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकी। उस दौर में जब अमिताभ बच्चन का स्टारडम चरम पर था, तब भी यह फिल्म उनकी बड़ी फ्लॉप्स में गिनी गई।

फिल्म की असफलता का असर निर्देशक मनमोहन देसाई पर गहरा पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस झटके के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली और लगभग संन्यास जैसा जीवन जीने लगे।

‘गंगा जमुना सरस्वती’ आज भी हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिनसे उम्मीदें तो आसमान छू रही थीं, लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा।

उदयपुर में ‘टू-स्टेट’ शादी! सुबह तेलुगू दुल्हन तो शाम को कूर्गी ब्राइड बनेंगी


 साउथ सिनेमा की चर्चित जोड़ी Rashmika Mandanna और Vijay Deverakonda की शादी को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है। सोशल मीडिया पर ‘ViRash’ के नाम से मशहूर यह कपल 26 फरवरी को Udaipur में शाही अंदाज में सात फेरे लेने जा रहा है। खास बात यह है कि शादी एक नहीं, बल्कि दो परंपराओं के अनुसार संपन्न होगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह का विवाह तेलुगू रीति-रिवाजों से होगा, जो विजय के परिवार की परंपरा है। इस दौरान रश्मिका पारंपरिक दक्षिण भारतीय दुल्हन के रूप में नजर आ सकती हैं—सुनहरी ज़री वाली कांजीवरम सिल्क साड़ी, टेम्पल ज्वेलरी, कमरबंद, माथे पर पापड़ी और चोटी में सजे मोगरे के फूल उनके लुक को रॉयल टच देंगे।

वहीं शाम को कूर्ग (कोडावा) परंपरा के अनुसार रस्में निभाई जाएंगी, जो रश्मिका की पैतृक संस्कृति से जुड़ी हैं। इस लुक में वह पारंपरिक कूर्गी साड़ी स्टाइल, खास हेडगियर और मिनिमल लेकिन एलिगेंट ज्वेलरी में दिख सकती हैं।

एक ही दिन में दो संस्कृतियों का संगम इस शादी को बेहद खास बना रहा है। यह समारोह सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि दो परंपराओं और विरासतों का सम्मान भी है।

राजस्थानी रंग में रंगा ‘थारे वास्ते रे ढोला’, अनुराधा-अलका-कविता की तिकड़ी ने बनाया अमर


 नई दिल्ली: साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म Bantwara का गीत ‘थारे वास्ते रे ढोला’ आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा है। राजस्थानी लोकधुन पर आधारित यह गाना अपनी मिठास, भावनात्मक गहराई और शानदार गायकी के कारण कालजयी बन गया।

इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसे हिंदी सिनेमा की तीन दिग्गज गायिकाओं—Anuradha Paudwal, Alka Yagnik और Kavita Krishnamurthy—ने मिलकर आवाज दी। तीनों की सुरमयी जुगलबंदी ने गाने को खास ऊंचाई दी और इसे उस दौर का सुपरहिट ट्रैक बना दिया।

परदे पर Dimple Kapadia और Amrita Singh जोगन के रूप में नजर आती हैं, जो Dharmendra और Vinod Khanna के प्रेम में डूबी दिखाई देती हैं। उनकी भाव-भंगिमाएं और पारंपरिक वेशभूषा गाने को और भी प्रभावशाली बनाती है।

इस यादगार गीत का संगीत मशहूर जोड़ी Laxmikant-Pyarelal ने तैयार किया था, जिन्होंने राजस्थानी लोक संगीत को बॉलीवुड अंदाज में ढालकर एक अनोखा संगम रचा। यही वजह है कि ‘थारे वास्ते रे ढोला’ आज भी पुराने संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में खास जगह रखता है।

‘शतक’ रिव्यू: टेक्नोलॉजी के दम पर उभरी विचारधारा की कहानी, VFX से सजी एक सदी की यात्रा


 फिल्म ‘शतक’ एक विजुअली भव्य और वैचारिक रूप से केंद्रित प्रस्तुति है, जो आधुनिक तकनीक, VFX और CGI के सहारे Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के लगभग सौ वर्षों के सफर को पर्दे पर उतारती है। 1925 में नागपुर से शुरू हुए एक संगठन के विस्तार और प्रभाव को फिल्म सिनेमाई अंदाज़ में दिखाती है।

निर्देशक Ashish Mool ने कहानी को ऐतिहासिक घटनाओं के साथ जोड़ा है—K. B. Hedgewar के दौर से लेकर M. S. Golwalkar (श्री गुरुजी) के नेतृत्व काल और देश विभाजन के उथल-पुथल भरे समय तक। फिल्म में संगठन के विस्तार, चुनौतियों और वैचारिक आधार को नाटकीय और तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया गया है।

‘शतक’ की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी पक्ष है। ऐतिहासिक दृश्यों को CGI और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से जीवंत बनाया गया है। 1920 और 1940 के दशक का माहौल, विभाजन के दृश्य और बड़े जनसमूहों की झलकियां प्रभावशाली लगती हैं।

फिल्म स्पष्ट रूप से एक विचारधारा और संगठन की यात्रा पर केंद्रित है। जो दर्शक आधुनिक भारतीय इतिहास और वैचारिक आंदोलनों को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म दिलचस्प हो सकती है। हालांकि, फिल्म का दृष्टिकोण एकतरफा प्रतीत हो सकता है, इसलिए इसे एक सिनेमाई प्रस्तुति के रूप में देखना अधिक उपयुक्त रहेगा।

कुल मिलाकर, ‘शतक’ तकनीक और राष्ट्रवाद के संगम का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो इतिहास को बड़े परदे पर प्रभावशाली अंदाज़ में पेश करता है।

‘शतक’ रिव्यू: टेक्नोलॉजी के दम पर उभरी विचारधारा की कहानी, VFX से सजी एक सदी की यात्रा


 फिल्म ‘शतक’ एक विजुअली भव्य और वैचारिक रूप से केंद्रित प्रस्तुति है, जो आधुनिक तकनीक, VFX और CGI के सहारे Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के लगभग सौ वर्षों के सफर को पर्दे पर उतारती है। 1925 में नागपुर से शुरू हुए एक संगठन के विस्तार और प्रभाव को फिल्म सिनेमाई अंदाज़ में दिखाती है।

निर्देशक Ashish Mool ने कहानी को ऐतिहासिक घटनाओं के साथ जोड़ा है—K. B. Hedgewar के दौर से लेकर M. S. Golwalkar (श्री गुरुजी) के नेतृत्व काल और देश विभाजन के उथल-पुथल भरे समय तक। फिल्म में संगठन के विस्तार, चुनौतियों और वैचारिक आधार को नाटकीय और तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया गया है।

‘शतक’ की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी पक्ष है। ऐतिहासिक दृश्यों को CGI और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से जीवंत बनाया गया है। 1920 और 1940 के दशक का माहौल, विभाजन के दृश्य और बड़े जनसमूहों की झलकियां प्रभावशाली लगती हैं।

फिल्म स्पष्ट रूप से एक विचारधारा और संगठन की यात्रा पर केंद्रित है। जो दर्शक आधुनिक भारतीय इतिहास और वैचारिक आंदोलनों को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म दिलचस्प हो सकती है। हालांकि, फिल्म का दृष्टिकोण एकतरफा प्रतीत हो सकता है, इसलिए इसे एक सिनेमाई प्रस्तुति के रूप में देखना अधिक उपयुक्त रहेगा।

कुल मिलाकर, ‘शतक’ तकनीक और राष्ट्रवाद के संगम का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो इतिहास को बड़े परदे पर प्रभावशाली अंदाज़ में पेश करता है।