Wednesday, 4 February 2026

पेड़ों की रक्षा के लिए सिर कटे, चाहे जान जाए’… बीकानेर में 3 दिन से जारी खेजड़ी आंदोलन, 5 की तबीयत बिगड़ी


 बीकानेर में खेजड़ी पेड़ों की कटाई के विरोध में चल रहा आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है। साधु-संतों और पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों की रक्षा के लिए सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि “पेड़ों की रक्षा के लिए सिर कटे, चाहे जान जाए”, लेकिन खेजड़ी वृक्षों को नुकसान नहीं होने देंगे। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए हैं और लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबा उपवास और विरोध जारी रहने के कारण अब तक पांच आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने की खबर है, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।

आंदोलनरत संतों का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य केवल पेड़ों को बचाना और पर्यावरण की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सनातन परंपराओं की बात तो करती है, लेकिन खेजड़ी जैसे पवित्र और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण पेड़ों को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता भागीरथ तेतरवाल ने मांग रखी है कि जब तक सख्त ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं होता, तब तक क्षेत्र में किसी भी पेड़ की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खेजड़ी पेड़ राजस्थान की संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और वार्ता की कोशिशें जारी हैं, ताकि शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

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