अगर भारतीय सिनेमा में कॉमेडी फिल्मों के सबसे बड़े निर्देशक का नाम लिया जाए, तो सबसे पहले प्रियदर्शन का ज़िक्र होता है। मलयालम से लेकर हिंदी सिनेमा तक, उन्होंने ऐसी फिल्में दीं जो आज भी दर्शकों को हंसाती हैं। प्रियदर्शन को कॉमेडी का बेताज बादशाह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।
प्रियदर्शन का जन्म केरल में हुआ था। उनके पिता एक लाइब्रेरियन थे और घर का माहौल सादा लेकिन पढ़ाई-लिखाई से भरपूर था। बचपन से ही प्रियदर्शन को साहित्य, रंगमंच और फिल्मों में रुचि थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद उनका झुकाव फिल्म निर्देशन की ओर बढ़ता चला गया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मलयालम सिनेमा से की और जल्द ही अपनी अलग पहचान बना ली। बाद में जब उन्होंने हिंदी फिल्मों का रुख किया, तो ‘हेरा फेरी’, ‘हलचल’, ‘हंगामा’, ‘गरम मसाला’, ‘चुप चुप के’ जैसी सुपरहिट फिल्मों से कॉमेडी की परिभाषा ही बदल दी। उनकी फिल्मों की खासियत है—मजबूत पटकथा, सिचुएशनल ह्यूमर और यादगार किरदार।
प्रियदर्शन को उनके योगदान के लिए दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं और हाल ही में उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। कॉमेडी के अलावा उन्होंने गंभीर और संवेदनशील फिल्में भी बनाई हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं।
लाइब्रेरियन के बेटे से लेकर देश के सबसे सम्मानित निर्देशकों में शामिल होना, प्रियदर्शन का सफर मेहनत, जुनून और रचनात्मकता की मिसाल है।
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