होने के दावे तेजी से बढ़ रहे हैं। इन मामलों की जांच करने पर सामने आता है कि ज्यादातर वीडियो या तो पूरी तरह फेक होते हैं या फिर डीपफेक तकनीक से बनाए जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान की सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अलीना आमिर (Alina Amir) का नाम भी ऐसे ही एक मामले में चर्चा में आ गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स पर अलीना आमिर से जुड़ा करीब 4 मिनट 40 सेकेंड का एक कथित प्राइवेट वीडियो वायरल होने का दावा किया जा रहा है। कई जगह इस वीडियो को देखने या डाउनलोड करने के नाम पर लोगों को लिंक भेजे जा रहे हैं, जिनके जरिए उनसे पैसे ऐंठे जा रहे हैं या उनके मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट हैक किए जा रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि यह वीडियो असली नहीं है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे वीडियो अक्सर डीपफेक या एडिटेड कंटेंट होते हैं, जिनका मकसद केवल लोगों को फंसाकर आर्थिक ठगी करना होता है। कई मामलों में ऐसे लिंक पर क्लिक करने से मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है।
Alina Amir एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं और उन्होंने इस तरह के किसी भी वीडियो से खुद को जोड़ने से इनकार किया है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर दावे पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी कथित प्राइवेट वीडियो के लिंक पर क्लिक न करें और न ही उसे आगे शेयर करें। ऐसा करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि आप खुद साइबर अपराध के शिकार भी हो सकते हैं।
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