भारत में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का असर अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। ताज़ा आकलनों के मुताबिक, बीते कुछ वर्षों में गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है और इसका सबसे बड़ा फायदा समाज के सबसे गरीब तबके को मिला है। सब्सिडी, सामाजिक पेंशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी पहलों ने कमजोर वर्गों की आर्थिक हालत को मजबूती दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि DBT ने बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म कर दी है, जिससे सरकारी मदद सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है। इससे न सिर्फ लीकेज रुकी, बल्कि गरीब परिवारों की खपत क्षमता भी तेजी से बढ़ी है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे निचले आय वर्ग की खपत वृद्धि दर, मध्यम और ऊपरी वर्ग की तुलना में अधिक रही है।
ग्रामीण इलाकों में उज्ज्वला योजना, पीएम किसान, मनरेगा, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन जैसी योजनाओं** ने आय का स्थिर सहारा दिया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में राशन, स्वास्थ्य बीमा और नकद सहायता ने कमजोर तबकों को महंगाई से राहत पहुंचाई है। इन पहलों का सीधा असर लोगों के जीवन स्तर, पोषण और शिक्षा पर भी पड़ा है।
सबसे अहम बात यह है कि इन योजनाओं के चलते आय असमानता में भी कमी देखने को मिली है। जिन वर्गों की आमदनी पहले ठहरी हुई थी, अब उनकी जेब में नियमित नकदी प्रवाह आया है।
कुल मिलाकर, सब्सिडी-पेंशन और DBT के संयोजन ने गरीबी पर प्रभावी ब्रेक लगाया है। यही वजह है कि आज भारत में सबसे गरीब तबका सबसे तेज आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ता दिख रहा है—जो समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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