80 के दशक में भारतीय टेलीविजन पर एक साधारण साड़ी पहने महिला की दमदार मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। यह थीं
कविता चौधरी, जिन्हें लोग ‘ललिता जी’ और ‘कल्याणी सिंह’ के नाम से जानते थे। ललिता जी सिर्फ विज्ञापन का किरदार नहीं थीं, बल्कि उन्होंने हर घर की समझदार और आत्मनिर्भर महिला की छवि को पर्दे पर पेश किया।
कविता चौधरी ने अपनी कला और दृष्टि से टीवी की दुनिया में क्रांति की। उन्होंने उड़ान में ‘कल्याणी सिंह’ का किरदार निभाकर देश की बेटियों को IPS और सिविल सेवा में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। यह शो उनकी बहन कंचन चौधरी भट्टाचार्य, जो देश की दूसरी महिला IPS बनी थीं, की सच्ची कहानी पर आधारित था।
एनएसडी से प्रशिक्षित कविता चौधरी ने केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि निर्देशन में भी अपनी छाप छोड़ी, जब महिलाओं के लिए यह मार्ग आसान नहीं था। उनका काम यह साबित करता है कि अगर महिला को ‘अबला’ नहीं बल्कि ‘सबल’ दिखाया जाए, तो भी दर्शक उसे उतना ही प्यार देते हैं।
हालांकि कविता चौधरी ने कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 2024 में दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनका योगदान आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उड़ान ने यह संदेश दिया कि बेटियां भी सिस्टम में अपना स्थान बनाकर समाज और प्रशासन में बदलाव ला सकती हैं।
No comments:
Post a Comment